श्रद्धा, शांति और
आस्था का दिव्य संगम

लाइव दर्शन, विशेष अनुष्ठान और पवित्र प्रसाद के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा लाएँ।

विशेष पूजाएँ

विशेष मंदिर अनुष्ठानों में भाग लें और अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाएँ।

शनिदेव अभिषेक नाम गोत्र के साथ

शनिदेव नवग्रह शांति हवन पूजा नाम गोत्र के साथ

पंचमुखी हनुमान कवच पाठ नाम गोत्र के साथ

शिव पंचामृत पूजा नाम गोत्र के साथ

दान (Donation)

1.शनिदेव पंचमुखी हनुमान पोशाक दान सेवा

2. मंदिर निर्माण दान सेवा

दान सेवा के माध्यम से आप धर्म एवं सेवा के पावन कार्य में अपना योगदान दे सकते हैं। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया दान सुख, शांति एवं पुण्य प्रदान करता है। भगवान की कृपा प्राप्त करने हेतु पोशाक दान एवं मंदिर निर्माण सेवा में सहभागी बनें।

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श्री शनिदेव पंचमुखी हनुमान मंदिर की विशेषता

शनिदेव जी का हाथी पर विराजमान होना शक्ति, धैर्य और राजसत्ता का प्रतीक माना जाता है। हाथी स्थिरता, बुद्धिमत्ता और सम्मान का प्रतीक है, ठीक उसी प्रकार शनिदेव न्याय, कर्म और जीवन में संतुलन प्रदान करते हैं। मान्यता है कि शनिदेव की कृपा से व्यक्ति को साहस, प्रतिष्ठा, बाधाओं से मुक्ति और सफलता प्राप्त होती है। हाथी पर सवार शनिदेव यह संदेश देते हैं कि धैर्य और अच्छे कर्मों से हर कठिनाई पर विजय पाई जा सकती है।

शनि चालीसा में लिखा गया —
“गज वाहन लक्ष्मी गृह आवे”
इसका अर्थ है कि जब शनिदेव हाथी (गज) पर सवार होकर किसी व्यक्ति के जीवन या घर में शुभ रूप से प्रवेश करते हैं, तब वहाँ माता लक्ष्मी का वास होता है। यानी शनिदेव की कृपा से धन, सुख, वैभव, सम्मान और स्थिरता प्राप्त होती है।

यह पंक्ति यह भी दर्शाती है कि शनिदेव केवल कष्ट देने वाले देवता नहीं हैं, बल्कि कर्म के अनुसार शुभ फल देने वाले न्यायप्रिय देव हैं। उनकी कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और व्यक्ति को सफलता, सुरक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

श्री पंचमुखी हनुमान जी की महिमा

श्री पंचमुखी हनुमान जी ने धर्म की रक्षा और भक्तों को संकटों से मुक्त करने के लिए पंचमुखी अवतार धारण किया था। यह दिव्य स्वरूप शक्ति, साहस, सुरक्षा और विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि पंचमुखी हनुमान जी के दर्शन और उपासना करने से भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा, ग्रह दोष और जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। उनकी कृपा से आत्मविश्वास, मानसिक शांति, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। पंचमुखी हनुमान जी का स्मरण भक्त के जीवन में रक्षा कवच के समान माना जाता है, जो हर संकट से रक्षा कर शुभ फल प्रदान करता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, जब अहिरावण ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण करके उन्हें पाताल लोक में बंदी बना लिया था, तब हनुमान जी उन्हें बचाने के लिए पाताल लोक पहुँचे। अहिरावण को वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु तभी होगी जब चारों दिशाओं में जल रहे दीपक एक साथ बुझाए जाएँ। इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी अवतार धारण किया।
इस दिव्य रूप में पाँच मुख थे —
पूर्व दिशा में हनुमान मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम दिशा में गरुड़ मुख, उत्तर दिशा में वराह मुख, आकाश की ओर हयग्रीव मुख इन पाँचों मुखों की शक्ति से हनुमान जी ने एक साथ पाँचों दीपकों को बुझाकर अहिरावण का वध किया और भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को मुक्त कराया। इसलिए पंचमुखी हनुमान जी का स्वरूप शक्ति, रक्षा, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता है।
पंचमुखी हनुमान जी की उपासना से भय, शत्रु बाधा, नकारात्मक शक्तियाँ, ग्रह दोष और जीवन के संकट दूर होने की मान्यता है।
इससे संबंधित विशेष तिथि को कई स्थानों पर पंचमुखी हनुमान जयंती या हनुमान जयंती के रूप में श्रद्धा से मनाया जाता है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी तिथि भिन्न हो सकती है, लेकिन सामान्यतः चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है।

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मंदिर पूजा एवं धार्मिक सामग्री

सिद्ध पंचमुखी हनुमान कवच यंत्र सिद्ध - 251₹
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सिद्ध घोड़े की नाल - 501₹
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सिद्ध नाल अंगुठी - 4pc 251₹
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नज़र बट्टू - 551₹
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फोर इन वन - 1101₹
मिनी गदा
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पोशाक सेवा - 2100₹
हनुमान मंत्र
1. ॐ हं हनुमते नमः
2. ॐ श्री हनुमते नमः
3. ॐ ऐं भ्रीम हनुमते श्री रामदूताय नमः
4. ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा
5. ॐ रामदूताय नमः
6. ॐ पवनपुत्राय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्
7. ॐ हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्
8. ॐ अंजनीसुताय नमः
9. ॐ महाबलाय नमः
10. ॐ संकटमोचन हनुमानाय नमः
शनि देव मंत्र
1. ॐ शं शनैश्चराय नमः
2. ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
3. नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्
4. ॐ शनिदेवाय नमः
5. ॐ ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः
6. ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः
7. ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे मृत्यु रूपाय धीमहि तन्नः शनि प्रचोदयात्
8. ॐ शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये
9. ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मंदः प्रचोदयात्
10. दशरथ कृत शनि स्तोत्र
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